नमस्कार दोस्तों, मैं चमन चंगेजी आपका अपने प्रिंट फेककॉस्ट वल्द वीडियो पॉडकास्ट में स्वागत करता हूं. आज मेरे साथ प्रिंट फेककॉस्ट में जुड़ेंगे खास मेहमान ललन फरेबी. आपने ललन फरेबी को ऑडियो-वीडियो माध्यम में फेंकते हुए बहुत देखा होगा, ये आज मेरे साथ फेकमफेंक करेंगे. आपको जानकारी दे दें कि वैसे तो हम दोनों ही बहुत बड़े फेकिस्ट हैं, लेकिन फेकिस्ट में जहां मैंने एम फिल किया है, वहीं फरेबी भाई साहब पीएचडी हैं. तो आइए शुरू करते हैं बहुप्रतीक्षित फेककॉस्ट.
चंगेजी – नमस्कार ललन फरेबी साहब. चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं, आप को क्या लगता है?
फरेबी – नमस्कार चमन साहब. इस बार मुझे लगता है कि दोनों ही गठबंधन जीतेंगे. हवा का रूख देखकर मुझे साफ लग रहा है कि जीत दोनों ही गठबंधन की होगी. आपको बताऊं, ध्यान से सुनियेगा और इसके पीछे की कहानी समझियेगा कि दोनों ही जीत जायें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिये.
चंगेजी – ऐसा किस आधार पर कह सकते हैं? जबकि अब कंसल साहब भी नहीं रहे. कंसल साहब की एक बात बताऊं. एक बार एक होटल व्यवसायी विधायक का चुनाव लड़ रहे थे. कंसल साहब ने कहा कि आप चुनाव हार रहे हैं. विधायक जी घबरा गये. उनके पसीने छूटने लगे. कहा कि कैसे फिर चुनाव जीतें? कंसल साहब ने कहा कि आप लखनऊ आइये. विधायक जी हांफते कांपते लखनऊ पहुंचे और धड़धड़ाकर कंसल साहब के पैरों पर गिर गये. कंसल साहब ने उनका कंधा पकड़कर कहा कि खड़े होइये मित्रवर. विधायक प्रत्याशी दुबारा खड़े हो गये, जबकि चुनाव में वह पहले से ही खड़े थे. अब देखिये कि कंसल साहब ने कहा कि खैनी बनाइये. और खुद मुस्कुराने लगे. विधायक जी प्रत्याशी खैनी बनाते हुए ही पूछने लगे कि कंसल जी भाई साहब हम कैसे चुनाव हार रहे हैं? कंसल जी भाई साहब ने मुस्कुराते अपने ओएडी को बाहर भेजा, फिर कहा कि हमको तो पैसा दिया वो ठीक है, अब जनता में साढ़े डेढ़ करोड़ रुपया बंटवाओ, तभी जीत पाओगे. फिर कंसल साहब ने बताया कि इस वोट बैंक पर तुम्हारा ध्यान ही नहीं है. तब विधायक जी प्रत्याशी एकदम भौचक्क रह गये. उनकी आंखें आगे की ओर निकल आईं, सचमुच उनका ध्यान उस जाति के वोट बैंक की तरफ नहीं था. इस तरह कंसल साहब ने उनको चुनाव जितवा दिया.
फरेबी – आपको बताऊं चंगेजी जी, कंसल साहब से बहुत पहले विनोद खन्ना साहब ने मुझे फोन किया. ये सन उनइस सौ पिच्छतीस की बात है. मुझसे पूछा कि क्या मैं चुनाव लड़ जाऊं? मैं सोच में पड़ गया कि अगर विनोद खन्ना साहब चुनाव लड़ेंगे तो कौन सी सीट सुरक्षित रहेगी. उन्होंने मुझे अल्टीमेटम दिया कि जब तक आप तय नहीं करोगे और बताओगे नहीं तब तक मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा. मैं तनाव में आ गया. मुझे वसूली करने जाना था, लेकिन कहां यह जिम्मेदारी मेरे कपार पर आ पड़ी. हमने सोचा वसूली तो बाद में भी कर लेंगे, अगर विनोद खन्ना साहब ने अपना समझकर जिम्मेदारी दी है तो फिर उनकी सीट तो तय करनी ही पड़ेगी. आप विश्वास नहीं करोगे, मैंने गुणा गणित बैठाया और अटलजी को फोन लगा दिया. हमने उनसे पूछा कि विनोद खन्ना भाई साहब का लड़ना कहां से उचित रहेगा? उन्होंने मेरा सवाल पूरा होने से पहले ही कह दिया, कि विनोद खन्ना को गुरुदासपुर से चुनाव लड़ने को बोलो, वह तुम्हारी बात मान जायेगा. मैं आश्चर्यचकित रह गया कि अटल जी को इतनी छोटी छोटी बातों के बारे में भी जानकारी है कि विनोद खन्ना भाई साहब किसकी बात मानेंगे?
चंगेजी – अदभुत. आपको एक वाकया मैं सुनाता हूं. एक बार मुझे मनमोहन सिंह जी ने फोन किया. राहुल गांधी फाड़ चुके थे. वो वाला कागज, जिसके चक्कर में लालू जी जेल गये. मनोहन सिंह ने मुझसे पूछा कि क्या मुझे इस्तीफा दे देना चाहिये. मैं कुछ देर सोचा फिर लगा कि इनको क्यों इस्तीफा देना चाहिये? राहुल ने तो कागज फाड़ा है, इन्होंने थोड़े ही फाड़ा है. वैसे भी उन्होंने केवल कागज ही फाड़ा था. मैंने समझाया, वह बहुत देर तक समझने को तैयार नहीं थे, लेकिन हमने गोविंद नारायण जी से कहकर उनको समझवाया, तब वह इस्तीफा वापस लेने को तैयार हुए वरना उनका इस्तीफा तो तय ही था. इस बात का जिक्र मनमोहन सिंह जी ने जार्ज डब्ल्यू बुश से भी किया था, तो बुश ने मुझे वाट्सएप मैसेज करके यह जानकारी दी.
फरेबी – बिल्कुल सही बात है ये. इसी से जुड़ा एक वाकया सुनाता हूं. यह बिल बनने जा रहा था. मुझे अहमद साहब का फोन आया कि इस पर क्या करना चाहिये? मैंने कहा कि आपलोग रणनीतिकार हैं बनाइये रणनीति. उन्होंने कहा नहीं, यहां किसी के कुछ समझ में नहीं आ रहा. मैं मुस्कुराया, फिर मैंने बताया कि इस बिल को सार्वजनिक तौर पर फाड़कर मैसेज देना चाहिये. पहले तो अहमद साहब थोड़े आश्चर्यचकित हुए कि इतना अच्छा आइडिया कैसे मेरे दिमाग में आया? तभी मैंने……
अभी फरेबी साहब की बात पूरी होती, उसके पहले ही लंबे समय से चंगेजी और फरेबी की फेककॉस्ट सुन रहे और तस्वीर खींच रहे फोटोग्राफर बबन खूंरेजी ने कहा, ‘’ई तो कुछ नहीं है. एक बार गांधी जी ने मुझे पत्र लिखा, लेकिन फोटो खिंचने के चलते मैं पत्र उठा नहीं पाया. फिर उन्होंने ग्राहम बेल से मेरा नंबर लेकर मुझे फोन किया, लेकिन मैं फोन पढ़ नहीं पाया. तब उन्होंने तार भेजा, और मुझसे पूछा कि मैं अहमदाबाद से दांडी की ओर जा रहा हूं कि मुझे कौन सी यात्रा निकालनी चाहिये या कौन सा सत्याग्रह करना चाहिये. मैंने कुछ दिन पहले ही नमक का दरोगा पढ़ा था, मैंने फटाक से कहा कि आप नमक को लेकर यात्रा के माध्यम से सत्याग्रह करिये, इसमें यात्रा और सत्याग्रह दोनों आ जायेगा. और उन्हें बेहद आश्यर्च हुआ. उन्होंने कंसल साहब को फोन लगाकर कहा कि विधायक जी पर ध्यान रखियेगा, वह चुनाव हार रहे हैं. उनसे पैसा बंटवा दीजिये. गांधी जी का कंसल जी को फोन करते समय मैंने तस्वीर भी ली, लेकिन तस्वीर में आवाज नहीं आ पाई वरना आज आप दोनों को सुनाता. और इससे……’’
आगे खूंरेजी साहब फेककॉस्ट में और कुछ बताते हुए उसके पहले ही चंगेजी साहब ने कहा, ‘’दोस्तों आज के लिये बस इतना ही. मिलते हैं किसी और लात लतंगड़ में. तब तक नमस्कार.’’

