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18.08.2026 · News Desk

आरक्षण पर रीना एन सिंह की याचिका का केंद्र ने किया विरोध

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में उन याचिकाओं का विरोध किया है, जिनमें एससी एसटी पिछड़े वर्ग और ईडब्ल्यूएस आरक्षण के भीतर आय के आधार पर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्राथमिकता देने तथा  एससी एसटी में पिछड़ा वर्ग की तरह ‘क्रीमी लेयर’ व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है.

केंद्र का कहना है कि आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था केवल आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है. विशेष रूप से एससी और एसटी की पहचान का आधार ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव, अस्पृश्यता, सामाजिक बहिष्कार और अन्य वंचनाएं रही हैं. इसलिए केवल आय के आधार पर इन वर्गों की आरक्षण व्यवस्था में बदलाव नहीं किया जा सकता.

यूके की सॉलीसीटर एवं सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन सिंह ने यह याचिका पिछले वर्ष अगस्त में दाखिल की थी. जिसमें यह मांग की गई थी कि आरक्षण देते समय उन लोगों को प्राथमिकता की जाए, जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है. इसमें भी क्रीमी लेयर की तरह एक सीमा तय की जाये.

सरकार ज़वाब देने से भाग रही थी

रीना एन सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में दिये गये 16 जून के अपने शपथ पत्र में भारत सरकार ने कहा है कि याचिकाकर्ता की जो मांग है, वह एक नीतिगत प्रश्न है, जिसके लिए सामाजिक और आर्थिक अध्ययन करना आवश्यक है. बिना अध्‍ययन के इस तरह के मामलों पर कोई भी निर्णय लेना न्‍यायसंगत नहीं है.

सुनवाई के बाद मीडिया कर्मियों से बात करते हुए रीना एन सिंह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण में प्राथमिकता देने के नाम पर सरकार आंकड़े जुटाने की बात कर रही है, और यूजीसी संशोधन लाते समय सरकार ने आंकड़ों की बात नहीं की थी. यह अपने आप में अत्यंत हास्यास्पद है.

उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि आरक्षित वर्ग के भीतर दो स्तर तैयार हो गया है. एक वो जो आर्थिक रूप से समृद्ध लोगों का है और एक अत्यंत गरीब लोगों का है. हमारी मांग है कि गरीबों को प्राथमिकता दी जाए. गरीबों को उचित मौका दिये बिना समानता संभव नहीं है. प्राथमिकता दी जायेगी तभी सामाजिक समरसता क़ायम हो सकेगी.

केंद्र सरकार ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 (2) और 342 (2)का जिक्र करते हुए और इंदिरा सहाय बनाम भारत संघ,अशोक कुमार ठाकुर बनाम भारत संघ एवं नागराज बनाम भारत संघ मामले का जिक्र करते हुए कहा है कि इस तरह के बदलाव करने का काम सिर्फ संसद के पास है ना कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के पास.

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