जोगी रा सा रा रा के ओएसडी रेलवे सिंह की असीमित यानी अमित ‘माल’गाड़ी मोटा माल लेकर सरपट दौड़ रही है. रेलवे सिंह जब जोगी रा के पास आये थे, तब छोटी गाड़ी से चलते थे, लेकिन अब उनके पास बीएमडब्ल्यू है, ऑडी है, कोठी है, निवेश है, बिल्डर हैं, ठेकेदार हैं, बिजनेसमैन हैं, चेले हैं और चार छह विभाग भी है. बताया जा रहा है कि रेलवे सिंह के पास एक कंबल भी है, जिसको ओढ़कर वह अरबों का नगद माल पी रहे हैं. अगर आप रेलवे सिंह की शानदार कोठी देख लेंगे तो आपको जोगी रा के दूसरे ओएसडी गन्ना सिंह का सुशांत गोल्फ सिटी में बना हजारों स्क्वायर फीट का घर फीका नजर आने लगेगा.
चचा फिरदौस बताते हैं कि रेलवे सिंह जब नये नये आये थे, तब उनकी आर्थिक स्थिति ग्लूकोज चढ़ाने जैसी थी, लेकिन जोगी रा के ओएडी बनते ही उनकी ‘माल’गाड़ी ऐसी बुलेट ट्रेन जैसी दौड़ी कि आज वह आर्थिक मामले में भवाली कुमार चमचावस्थी से कुछ फीट नीचे ही रह गये हैं. ऐसा लग रहा है कि उन्होंने कहीं रुपया उगाने वाला कोई पेड़ लगा रखा है, तभी रेलवे सिंह की ‘माल’गाड़ी बिना किसी रोकटोक के सरपट भागी जा रही है. रास्ते में कहीं कोई रेड सिग्नल नहीं है, बस चारो तरह ग्रीन ही ग्रीन नजर आ रहा है. कई आईएएस भी उनकी ‘माल’गाड़ी की रोज बढ़ती रफ्तार देखकर अपने माल कमाने की काबिलियत पर शर्मिंदा हो रहे हैं.
चचा फिरदौस का कहना है कि ‘पक्का काम, चोखा दाम, फंसे मामला तो ले लो जोगी रा का नाम’ योजना के तहत रेलवे सिंह रायबरेली वाले सत्ताधारी नेता दिनकर सिंह के काम के बदले गोमती नगर विस्तार में कई हजार वर्गफीट का वसुंधरा ईनाम में प्राप्त किये हैं. पूरा परिवार गदगद है. अब उसके पास बीएमडब्ल्यू है, ऑडी है, कोठी है, निवेश है, बिल्डर हैं, ठेकेदार हैं, बिजनेसमैन हैं, चेले हैं, चार छह विभाग हैं और रायबरेली निधि से गिफ्टेड गोमीनगर विस्तार में हजारों स्क्वायर फीट जमीन भी है. कभी अमीर खुसरो ने कश्मीर के लिये कहा था, “गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त.’’ रेलवे सिंह लूटरो कहते हैं, ‘’गर शासन से तुम्हारा काम कराया तब, कट मनी, रुपये, जमींन हमारा समस्त.’’
चचा फिरदौस ही बताते हैं कि रेलवे सिंह को पता है कि वक्त किसी का नहीं होता है, लिहाजा वह अपनी ‘माल’गाड़ी को इस कदर भर लेना चाहते हैं ताकि उनकी आने वाली आठ दस पीढि़यों को कोई तकलीफ ना हो. इसलिये आगामी विधानसभा चुनाव में जोगी रा के चुनावी चंदे के नाम पर रेलवे सिंह पीडब्ल्यूडी, आवास, उद्योग, विकास प्राधिकरणों से मोटा माल काट रहे हैं और उसका केवाईसी अपने निजी खातों में कर रहे हैं. नोएडा में भी उनकी बुलेट रफ्तार चलती ‘माल’गाड़ी ने गदर काट रखा है, अन्य सारे लोग पीछे छूट चुक हैं. वसूली और निवेश दोनों का बराबर ख्याल रख रहे हैं ताकि जब रेलवे सिंह की रेल वापसी हो तो किसी चीज की कोई कमी ना रहे.
और जोगी रा हैं कि उनको कुछ खबर ही नहीं कि उनके नजदीक कितनी ‘माल’गाडि़यां बुलेट की रफ्तार से नोट-जमीन-कोठी-बंगला छापते-बनाते सरपट भाग रही हैं. इधर हमारे जैसी गरीबी जनता खुद को दबा कुचला महसूस कर रही है. आम तक चूसने का मौका नहीं मिल रहा है.

