लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे का उद्घाटन 13 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, (एथेनॉल मिलावट) मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ ने किया था. 13 जुलाई को उद्घाटित यह एक्सप्रेस वे 13 दिन भी नहीं चला और इसकी तेरहवीं हो गई. 13 जुलाई को शुरु हुआ यह एक्सप्रेस वे 13 दिन के भीतर ही तीन जगह से खराब हो गया. लगभग 4700 करोड़ की लागत से बनने वाले इस एक्सप्रेस का तीन का तेरह किस कंपनी ने किया है, आइए जानते हैं इसके बारे में!
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे – 6 का निर्माण केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन आने वाले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई ने कराया है, जिसके विभागीय मंत्री नितिन गड़करी जी हैं. नितिन जी ने इस एक्सप्रेस वे को बनाने का ठेका पीएनसी इन्फ्राटेक लिमिटेड को दिया था, जो भाजपा नेता एवं आगरा के पूर्व मेयर नवीन जैन और उनके भाइयों प्रदीप जैन एवं चक्रेश जैन की कंपनी है. इन्हीं तीनों के नाम के पहले अक्षर के हिसाब से कंपनी का नाम पीएनसी है.
पीएनसी 9 अगस्त 1999 को पीएनसी कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के रूप में अटल बिहारी बाजपेयी सरकार के दौरान स्थापित किया गया था. 2001 में इसे प्राइवेट से पब्लिक कंपनी बना दिया गया. इस दौरान इस कंपनी को भाजपा सरकार के तत्कालीन केंद्रीय परिवहन मंत्री बीसी खंडूरी के सहयोग से 2001 में आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेस वे का काम मिला. यहां से शुरू हुआ सफर फिर आगे ही बढ़ता चला गया. 2007 में इसे पीएनसी इन्फ्राटेक लिमिटेड बना दिया गया.
बताते हैं कि इस कंपनी में पिछले दरवाजे से कई अधिकारियों-नेताओं के पैसे भी लगे हुए थे, जिन्होंने इस कंपनी को आगे बढ़ाने तथा काम दिलाने में खूब मदद की. 2013-14 में 1162 करोड़ के कुल टर्न ओवर वाली कंपनी का र्टनओवर वर्तमान में 6000 करोड़ को पार कर चुकी है. 2013-14 में मात्र 70 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित करने वाली कंपनी बीते वित्तीय वर्ष में 832 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित किया है. आज भाजपा सरकार एवं नेताओं के सहयोग से पीएनसी के पास ढेर सारे प्रोजेक्ट्स हैं.
खैर, यह तो रही कंपनी की बात. अब आते हैं एक्सप्रेस वे पर. देश के सबसे महंगे एक्सप्रेस वे में शुमार लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे – 6 एक बरसात तो छोडि़ये, हल्की बरसात में ही कई जगहों पर खराब हो गई है. यातायात भी प्रभावित है. स्पेस टेक्नॉलजी से सड़क बनाने का दावा करने वाले केंद्रीय परिवहन मंत्री एवं उनके विभाग की कलई केवल लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे पर ही नहीं खुली है,बल्कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे समेत कई सड़कों पर खुल चुकी है.
दरअसल, भ्रष्टाचार और विकास एक दूसरे के पर्याय हैं. अमेरिका के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री सैमुअल पी हंटिगटन ने अपनी किताब ‘पॉलिटिकल ऑर्डर इन चेंजिंग सोसाइटी’ में तर्क दिया है कि अत्यधिक कड़ा, केंद्रीयकृत एवं अक्षम नौकरशाही वाले विकासशील देशों में भ्रष्टाचार नियमों और रुकावटों को दरकिनार कर आर्थिक गतिशीलता और निवेश को आगे बढ़ाने का काम कर सकता है. उन्होंने भी अर्थव्यवस्था के लिये कठोर, सेंट्रलाइज एवं ईमानदार नौकरशाही वाले समाज को बदतर माना था.
कहने का आशय यह है कि हंटिंगटन ने भी माना था कि विकास एवं भ्रष्टाचार एक दूसरे के पर्याय हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि यह तभी सही ढंग से काम करेगा, जब इसकी एक नियंत्रित एवं सुनिश्चित मात्रा होगा. अतिशय भ्रष्टाचार अर्थव्यवस्था को केंद्रीकृत एवं सुस्त बना देगा. आज भारत में ऐसा ही चल रहा है. विकास कम और भ्रष्टाचार ज्यादा हो रहा है. उपर से सरकार एवं नौकरशाही भी पूरी तरह बेशर्म हो चुकी है, उन्हें भ्रष्टाचार करने में तनिक भी लाज नहीं है.
लाज-लिहाज तो खैर अब जनता और समाज में भी नहीं है. समाज ने भी भ्रष्टाचार को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है.

