वर्ष 2014 के बाद से भगवान पर केवल वीआईपी लोगों का ही पूजा पाठ स्वीकार करने का दबाव है. आम आदमी के लिये भगवान के पास ना तो समय है, और ना ही मूड. काशी में भोले भंडारी इतने दबाव में हैं कि वह केवल वीआईपी लोगों की ही सुनेंगे, अब सामान्य भक्तों को अपनी सुनाना हो तो केवल दूर से सुना सकता है, नजदीक जाने की ना तो उसकी औकात है, और ना ही उसका हक! क्योंकि सरकार तो वीआईपी है ही अब सरकार के नौकर चाकर भी वीआईपी हो चुके हैं.
सावन में बनारस में भक्तों की अथाह भीड़ उमड़ती है. पैदल बिना जूता चप्पल दूर दूर से भक्त, जो अमीर और वीआईपी नहीं होते हैं, आकर बाबा को जल चढ़ाते हैं. बाबा के पास जाकर जल चढ़ाने की मनाही रहती है, क्योंकि भीड़ का दबाव बहुत रहता है, लिहाजा काशी विश्वनाथ मंदिन प्रशासन ने तय किया था कि गरीब भक्तों की भीड़ को देखते हुए अब 28 अगस्त तक कोई ईआईपी वीआईपी दर्शन नहीं होगा. सबको एक समान लाइन में लगकर दूर से दर्शन करना होगा.
पर, नियम कानून गरीब, लाचार और मजलूमों के लिये बनते हैं. बड़े आदमी नियम से ऊपर होते हैं. भगवान भी शायद यही मानते हैं, इसलिये वह बड़े लोगों को नजदीक बुलाकर दर्शन देते हैं. आईएएस से रिटायर होकर सलाहकार बन चुके अवनीश कुमार अवस्थी और उनकी मेहरारू एक दिन पहले बनारस में थे. अभी हाल में ही इनलोगों का विवाह का कुछ ज्यादा ही साल हो चुका था. इसी उपलक्ष्य में ई लोग बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने बनारस पहुंचे थे.
चलो तुम बनारस पहुंचे अच्छी बात है. तुम बड़े आदमी हो ये भी अच्छी बात है. तुम्हारी मेहरारू भी बड़ी कलाकार है अच्छी बात है. तुम आते दर्शन करते निकल जाते, तब लगता कि तुमको भूखे-प्यासे पैदल चलकर आने वाले भक्तों की चिंता है, लेकिन तुम्हें दूसरे किसी की सुविधा की चिंता नहीं है, तुम्हें केवल इस बात की चिंता है कि तुम अपना भौकाल दिखाओ, और अपनी मेहरारू के साथ योगी आदित्यनाथ के स्टाइल में शिवलिंग को छू छूकर पूजा पाठ करो.
मंदिर प्रशासन ने तय किया था कि 28 अगस्त तक कोई वीआईपी दर्शन नहीं होगा, लेकिन जब खुद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ही जिसको गोद ले रखा हो, फिर उसके लिये किसी मंदिर प्रशासन का क्या नियम और क्या कानून? नियम कानून तो केवल सलाहकार साहब और उनकी मेहरारू का चलेगा. मंदिर प्रशासन ने सावन महीने में ही सलाहकार साहब को विधिविधान से भगवान भोलेनाथ का पूजा कराया.
अब सलाहकार साहब की ताकत देखिये, जिस मंदिर प्रशासन ने 28 अगस्त तक वीआईपी दर्शन पर रोक लगा रखी थी, इनको पूजा कराने के बाद अब तय किया है कि सुगम दर्शन सोमवार को छोड़कर अब हर दिन जारी रहेंगे. यह सब इसलिये किया गया ताकि मंदिर प्रशासन की छीछालेदर ना हो कि अवस्थी साहब को वाह वाह और आम भक्त को आह आह. भगवान शायद अब बड़े लोगों का ही सुनते हैं इसलिये वीआईपी दर्शन फिर से चालू हो गया है.
क्या भगवान कैसे कैसों को आप मिल जाते हैं?

