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14.08.2026 · News Desk

यूपी के आईएएस अफसरों से पीएनसी कंपनी का रिश्ता क्या कहलाता है? 

  • लखनऊ एयरपोर्ट घोटाले में सीबीआई-ईडी के रडार पर आये थे दुर्गा शंकर मिश्रा, अब सुर्खिंयों में एनएचएआई चेयरमैन संतोष यादव 
  • कम्पनी पर ठेकों में भ्रष्टाचार व अफसरों को खरीदने के लगे हैं आरोप

मनीष श्रीवास्तव

सैयां भये कोतवाल तो डर काहे का, इस कहावत पर करीब 4800 करोड़ के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण कराने वाली आगरा की पीएनसी इंफ्राटेक खरी उतरती है। जिसका पारिवारिक संबंध भाजपा सांसद नवीन जैन से है।  ‘संदेश वाहक’ ने शनिवार (आठ अगस्त 2026) के संस्करण में ‘वर्षों से भ्रष्टाचार की दरारों के बीच सरपट दौड़ रही हाईवे ठेका एक्सप्रेस’ शीर्षक से खबर प्रकाशित करके खुलासा किया था कि पीएनसी की एनएचएआई पर बादशाहत बरकरार है।

बारी अब यूपी के उन दो वरिष्ठ आईएएस की है। जिनके कार्यकाल में पीएनसी पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप तो लगे, सीबीआई-ईडी के फेर में भी कंपनी फंसी। बावजूद इसके बाल बांका तक न हुआ। दूसरा एनएचएआई का मुखिया है। पहला नाम यूपी के पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा का है। मामला 129 करोड़ के लखनऊ एयरपोर्ट के नए टर्मिनल समेत अन्य निर्माणों में घोटालों से जुड़ा है।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इण्डिया (एएआई) ने निर्माण का जिम्मा पीएनसी इंफ्राटेक और आईपीएल-ब्रह्मपुत्र इंफ्रा को 2007 में सौपा था। एप्रेन व टैक्सी वे का टेंडर पीएनसी को 39.72 करोड़ में व पैसेंजर टर्मिनल का ठेका ब्रह्मपुत्र इंफ्रा को 77.36 करोड़ में मिला। आईपीएल कंपनी को ब्रह्मपुत्र ने साथ जोड़ लिया था। बाद में आईपीएल ब्रह्मपुत्र से अलग हो गई। महंगे सीमेंट व ठेके की लागत बढ़ाने से लेकर अहर्ताएं बदलने के आरोप भी अफसरों पर लगे। ठेका काफी लेट किया गया।

सीबीआई लखनऊ की एसीबी शाखा ने एफआईआर में कई अफसरों को नामजद करते हुए अप्रैल 2012 में लखनऊ, दिल्ली, कोलकाता, आगरा और हैदराबाद में अफसरों व कंपनियों से जुड़े 18 ठिकानों पर छापेमारी की। घोटाले में तत्कालीन एएआई चेयरमैन वीपी अग्रवाल (2007 में प्रोजेक्ट के दौरान मेंबर प्लानिंग) और एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुख्य विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) दुर्गा शंकर मिश्रा भी सीबीआई के स्कैनर पर आये।

इसी दौरान ईडी ने भी एयरपोर्ट अथॉरिटी, पीएनसी व ब्रह्मपुत्र इंफ्रा व इन दोनों अफसरों को राडार पर लेते हुए मनी लांड्रिंग का केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी। इस केस में वाराणसी एयरपोर्ट के सुदृढ़ीकरण का 38 करोड़ का ठेका भी शामिल था। आरोपों के मुताबिक 2009 में दोनों ठेकों में भ्रष्टाचार की शिकायत पर जांच का जिम्मा तत्समय अथॉरिटी में सीवीओ के पद पर तैनात पूर्व आईएएस दुर्गा शंकर मिश्रा को थमाया गया।

सूत्रों की माने तो बजाय आरोपी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने के, मिश्रा ने इसे मानव भूल करार देते हुए घोटाले से जुड़ी पूरी फाइल ही बंद कर दी। फिर एयरपोर्ट अथॉरिटी के इन घोटालों में सीबीआई-ईडी की एंट्री हुई और केस दर्ज होने के बाद दुर्गा शंकर मिश्रा भी रडार पर आ गए। हालांकि मिश्रा का एजेंसियां कुछ न बिगाड़ सकी।

बारी अब यूपी के एक और आईएएस संतोष कुमार यादव की है। जो एनएचएआई में 2023 से चेयरमैन हैं। दो वर्ष पहले सीबीआई ने एमपी में एनएचएआई अफसरों के घूसखोरी काण्ड पर पीएनसी निदेशकों पर एफआईआर दर्ज करते हुए छापे मारे थे। दो दिन पहले ही चार्जशीट दाखिल हुई है। झांसी-खजुराहो हाईवे प्रोजेक्ट के डायरेक्टर पुरुषोत्तम चौधरी और पांच पीएनसी कर्मियों को गिरफ्तार भी किया गया।

भाजपा सांसद के भाई योगेश जैन के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ। पीएनसी को इसके बाद एक साल के लिए ठेकों से प्रतिबंधित किया गया। ब्लैकलिस्ट करने की सख्त कार्रवाई नहीं की गयी। भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद पीएनसी को लगातार एनएचएआई से हजारों करोड़ के ठेके कैसे मिल रहे हैं, यह बड़ा सवाल है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की सीबीआई जांच क्यों नहीं?

4800 करोड़ के लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे में भ्रष्टाचार की दरारें बड़े घोटाले की तरफ इशारा कर रही हैं। पीएनसी खुद बयान जारी कर अयोग्य घोषित होने से इंकार कर रही है। एनएचएआई को सीबीआई जांच की अनुशंसा से परहेज है। सोमवार को भी किमी. 63.8 और 63.9 के करीब सड़क पर दरार जैसी स्थिति व गड्ढा दिखाई दिया। शनिवार को मरम्मत हुई थी। 48 घंटे में डामर की परत उखड़ती नजर आई। मरम्मत की गुणवत्ता भी कटघरे में है। एक्सपेंशन ज्वाइंट, डिवाइडर व क्रैश बैरियर की सुरक्षा सवालों में है। खडग़पुर आईआईटी की जांच की दिशा मानो ड्रेनेज सिस्टम की खामियों तक सिमटती जा रही है।

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