उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी गर्माहट अभी से बढ़ने लगी है। मुख्य विपक्षी दलों और क्षेत्रीय ताकतों ने अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी की राजनीति में एक बड़ा सियासी दांव खेला है।
ओवैसी ने समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए खुले तौर पर गठबंधन का प्रस्ताव दिया है। ओवैसी ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी का एकमात्र और मुख्य लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) को उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने से रोकना है। ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले महज 10 दिनों के भीतर यह दूसरा मौका है जब AIMIM प्रमुख ने सपा को गठबंधन का न्योता दिया है।
मुरादाबाद के मंच से ओवैसी का सपा को सीधा संदेश
शनिवार रात मुरादाबाद में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने सपा नेतृत्व को यह संदेश दिया। उन्होंने कहा कि AIMIM हाथ मिलाने और एक साथ मैदान में उतरने को पूरी तरह तैयार है, और अब बातचीत शुरू करने का यही सबसे मुफीद वक्त है।
ओवैसी ने अपनी बात रखते हुए कहा:
“हमारी लड़ाई कभी किसी धर्म के खिलाफ नहीं रही और न कभी होगी। हमारी यह लड़ाई सिर्फ हमारी गरिमा, वजूद और न्याय के लिए है। मैं हाथ मिलाने को तैयार हूं, मैं गठबंधन बनाने को तैयार हूं। यही बातचीत करने का बिल्कुल सही समय है।”
“बीजेपी को हराने के लिए हम साथ आने को तैयार हैं”
अक्सर समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों द्वारा यह आरोप लगाया जाता रहा है कि ओवैसी के चुनाव मैदान में उतरने से वोटों का बिखराव होता है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलता है। इस आरोप पर पलटवार करते हुए ओवैसी ने कहा:
“आप (सपा) कहते हैं कि ओवैसी के चुनाव लड़ने से आपको नुकसान होता है। तो ठीक है, मैं आपके साथ मिलकर चुनाव लड़ने को तैयार हूं। अब हमें केवल बराबरी और सम्मान चाहिए।”
इस कदम के क्या हैं सियासी मायने?
- मुस्लिम वोटों के बिखराव को रोकने की कोशिश: अगर सपा और AIMIM साथ आते हैं, तो राज्य में मुस्लिम वोटों के बंटवारे पर ब्रेक लग सकता है।
- सपा पर सियासी दबाव: ओवैसी का यह खुला प्रस्ताव अखिलेश यादव के लिए एक दोधारी तलवार जैसा है। अगर वे इसे स्वीकार करते हैं तो वोटों का ध्रुवीकरण बढ़ सकता है, और अगर ठुकराते हैं तो ओवैसी इसे ‘मुस्लिम नेतृत्व को नज़रअंदाज़ करने’ के तौर पर पेश कर सकते हैं।
- BJP को रोकने का साझा नैरेटिव: ओवैसी यह साबित करना चाहते हैं कि वे बीजेपी को हराने के लिए अपने रुख में लचीलापन दिखाने को तैयार हैं।
तिरछी कटारी सत्य है इसलिए कड़वा है