मुझे लोग सीरियसली नहीं लेते थे बल्कि इग्नोर कर देते थे. ‘चूसना’ नहीं आने के चलते मुझे किसी भी ‘आम पार्टी’ में खास की तरह नहीं बुलाया जाता था, क्योंकि मैं ठीक से ‘चूस’ नहीं पाता था. मैं ‘चूसने’ में बेहद ही कमजोर माना जाता था. जो लोग ठीक से ‘चूस’ लेते हैं, उन्हें ‘आम पार्टी’ में खास की तरह …
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तिरछी कटारी सत्य है इसलिए कड़वा है